मंगल ग्रह पर एक बार फिर जीवन के सबूत मिले हैं, वैज्ञानिकों का मानना है कि तीन अरब साल से ज्यादा पहले मंगल के जेजेरो क्रेटर आसपास धरती की तरह वातावरण था. मंगल ग्रह
नासा के पर्सिवियरेंस रोवर ने अंतरिक्ष यान डाटा का विश्लेषण कर दावा किया है कि क्रेटर के बगल में जेजेरो मॉन्स नामक पर्वत कभी एक सक्रिय ज्वालामुखी था. नासा का पर्सिवयरेंस रोवर
वैज्ञानिकों ने 2007 में ही इसे खोज लिया था, मगर इसके बारे में ठोस सबूत पर्सिवियरेंस रोवर मंगल ग्रह पर पहुंचने के बाद ही सामने आए हैं. रिसर्च कर रहे वैज्ञानिक
कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरमेंट में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक जेज़ेरो मॉन्स विस्फोटक स्ट्रैटोज्वालामुखियों से मिलता-जुलता है और धरती के ज्वालामुखी की तरह ही है. ज्वालामुखियों की तरह
2021 में यहां पर्सिवियरेंस रोवर पहुंचा था, इसके बाद से ये लगातार लाल ग्रह के अतीत के बारे में सुराग खोजने में लगा हुआ है. यही रोवर जेजेरो क्रेटर के पास रिसर्च कर रहा है. सुराग खोज रहा रोवर
इससे पहले रिसर्च से पता चला है कि 3.7 बिलियन साल पहले उल्कापिंड के प्रभाव यहां एक गहरा गड्ढा बना था, जिसमें पानी भरने से एक झील बन गयी थी. मंगल पर झील भी
वैज्ञानिकों का मानना है कि मंगल पर पानी पहले से ही था, अब ज्वालामुखी गतिविधि होने से इस बात की संभावना बढ़ी है कि मंगल पर जीवन संभव है. लाल ग्रह पर जीवन संभव
अब वैज्ञानिक चट्टानों से लिए गए नमूनों को धरती पर वापस लाने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि वैज्ञानिक जो संभावना जा रहे हैं, उन्हें साबित किया जा सके. नमूनों के आने का इंतजार